बहुत अजीब सी बैचैनी महसूस कर रहा हूँ रात भर अजीब सी कसमकस में करवट बदलता रहा और दिमाग में उठने वाली तमाम तरह की विचारों को समझने की कोशिश करता रहा रात के सन्नाटे में गूंजने वाली घड़ी की tiktik करती avaj बैचैनी और barha देती दिल एक अजीब सी ghabrahat से भर jata bar-bar ankhe
mund कर sone की kosis करता कभी takiye पर सर रख कर to कभी सर पर takiye को ,पर नींद to koso dur थी
फिर उठ कर baith गया और दिमाग में उठते duand से manthan करने की thani फिर सोचा इस दिमाग में उठे तूफान का karan क्या है सभी cheeje आँखों के samne ghumne लगी एक दोस्त ने फ़ोन करके बताया yar तू क्या कर रहा हैं अब to उसकी भी saदी तय हो gayi tune कुछ कहा क्यों नही मैं अपनी bhabnaon को kabu में karne की anarthak सी kosis करने लगा मेरी आँखों के samne andhera sa chhane लगा उस तरफ़ से आने वाली avaj mano मुझे sunai ही नही दे रही थी kaleja dhak से रह गया लग रहा था मैं murt बन गया हूँ हाथ kapne लगे ,pair thartharane lage lagne laga main gir jaunga achanak udhar se avaj aayi halo ,halo मैं harbaraya और samhalne की nakam kosis करने लगा
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