Monday, February 15, 2010
कुछ दिनों की शांति के बाद पुणे में एक बार फिर बम बिस्फोट हुआ । कुछ निर्दोष लोगो की जान गयी और कुछ लोग घायल हुए। ये मुंबई की घटना के बाद पहली घटना थी । घटना ने सरकार को एक बार फिर अपनी तयारी के बारे में एहसास करा दिया। उसे बता दिया की वो कितनी तैयार है इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए। जिसने भी ये शर्मनाक घटना को अंजाम दिया है उसे सख्त से सख्त सजा दिया जाना चाहिए। लेकिन मुंबई के जिम्मेदार लोगो को जब अभी तक सजा नहीं मिल पाई तो इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है की इसके कसूरवार लोग का क्या होगा। अभी हाल ही में सरकार ने पाकिस्तान के साथ समग्र वार्ता शुरू करने की पेशकश की है। कुछ लोगो का कहना है की , उसे रोकने या इस तरह की पहल को नुक्सान पहुचने के लिए इस प्रकार का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इसमें जिनकी जान गयी है उनका क्या कसूर है। उन्हें ये बात क्यों नहीं समझ आती की, हिंसा से कुछ नहीं हासिल होता। लोगो को मारकर वे क्या साबित करना चाहते है। लोगो को ऐसी स्तिथि में सब्र से काम लेना चाहिए।
हाल ही में मैंने एक खबर पढ़ी। वो बाघ के बारे में थी। उसमे बताया गया था की बाघ की संख्या दिनोदिन घटती जा रही है। पहले जो संख्या ३५०० के आसपास थी वो अब घटकर १४०० के पास रह गयी है। यह बहुत ही चिंता का विषय है। हमने इसे राष्ट्रीय पशु तो घोषित कर दिया परन्तु इसकी उचित देखभाल नहीं कर सके। हमे इसका कारन खोजना होगा। जब-जब ये रिपोर्ट आती है तब सरकार जागती है और कुछ घोसना कर देती है। घोसना केवल कागज पर ही रह जाती है। कुछ ठोश कदम नहीं उठाये जाते। बाघों की घटती संख्या का कारन उचित संरक्षण का न होना,अवैध रूप से उसकी तस्करी करना तथा कुछ पैसों के लिए उसकी जान लेना है। हमें इस ओर ध्यान देना होगा। सरकार तथा लोगो को आगे आना होगा तथा लोगो को जागरूक करना होगा। दुनिया कितनी अजीब होगी जब पृथ्वी जानवर विहीन हो जाएगी। भगवान ने सभी प्राणियों में मनुष्य को सबसे अधिक समझदार बनाया परन्तु वो ही उसकी रचना को नस्ट करने पर तुला है। चाइना ने इस वर्ष को बाघ वर्ष घोषित किया है। हमें उसके पहल का स्वागत करना चाहिए। हमें आशा करनी चाहिए की हमारी सरकार भी इस ओर प्रयास करेगी।
Subscribe to:
Posts (Atom)