Monday, February 15, 2010

हाल ही में मैंने एक खबर पढ़ी। वो बाघ के बारे में थी। उसमे बताया गया था की बाघ की संख्या दिनोदिन घटती जा रही है। पहले जो संख्या ३५०० के आसपास थी वो अब घटकर १४०० के पास रह गयी है। यह बहुत ही चिंता का विषय है। हमने इसे राष्ट्रीय पशु तो घोषित कर दिया परन्तु इसकी उचित देखभाल नहीं कर सके। हमे इसका कारन खोजना होगा। जब-जब ये रिपोर्ट आती है तब सरकार जागती है और कुछ घोसना कर देती है। घोसना केवल कागज पर ही रह जाती है। कुछ ठोश कदम नहीं उठाये जाते। बाघों की घटती संख्या का कारन उचित संरक्षण का न होना,अवैध रूप से उसकी तस्करी करना तथा कुछ पैसों के लिए उसकी जान लेना है। हमें इस ओर ध्यान देना होगा। सरकार तथा लोगो को आगे आना होगा तथा लोगो को जागरूक करना होगा। दुनिया कितनी अजीब होगी जब पृथ्वी जानवर विहीन हो जाएगी। भगवान ने सभी प्राणियों में मनुष्य को सबसे अधिक समझदार बनाया परन्तु वो ही उसकी रचना को नस्ट करने पर तुला है। चाइना ने इस वर्ष को बाघ वर्ष घोषित किया है। हमें उसके पहल का स्वागत करना चाहिए। हमें आशा करनी चाहिए की हमारी सरकार भी इस ओर प्रयास करेगी।

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